गुरुवार, 24 मई 2018
सोमवार, 7 मई 2018
तीसरी दुनिया ( एक संस्मरण)
तीसरी दुनिया ( एक संस्मरण)
सन् 1972 -73 की बात है लखनऊ में जगह जगह लोग कहते फिरते थे कि प्रभात स्टोव में एक पहुंचे हुए महात्मा की आत्मा आती थी । इस बात का बहुत प्रचार था । जिज्ञासा वश अथवा कौतुहल वश जहाँ देखो लोग उन महात्मा की आत्मा का आह्वान उस स्टोव के माध्यम से करते थे, जिसकी प्रक्रिया बहुत सरल थी । प्रभात स्टोव, मिट्टी के तेल से जलने वाला, एक स्टोव था, जो प्राय: उस समय सभी घरों में उपलब्ध था । उक्त दिवंगत महात्मा की आत्मा को आह्वान करने की प्रक्रिया भी बहुत सरल थी । उस स्टोव की टंकी को बस खाली करके पूरे स्टोव को टंकी सहित बड़ी सफाई से धोकर उसकी टंकी में चीनी का शर्बत भर दिया जाता था और स्टोव महान आत्मा के आह्वान के लिए तैयार हो जाता था ।
पुराने जमाने के लोगों को याद होगा कि इस स्टोव में तीन टांगे हुआ करती थी । पम्प वाले इस स्टोव में महान आत्मा के आह्वान के समय पम्प का कोई मतलब नहीं होता था । बस एक स्वच्छ स्थान पर रख कर तीन कुंवारी कन्याओं को स्टोव के तीन पैरों के ऊपरी भाग में
अपनी तर्जनी रख कर स्टोव देवता के नाम से मशहूर उन महान आत्मा का आह्वान करना होता था । मेरे घर में एक शादी थी अत: मैं भी घर के रिश्तेदारों के समागम में वहाँ उपस्थित था । मेरे सामने उस महान आत्मा का आह्वान तीन कुआँरी कन्याओं के द्वारा किया गया । उन कन्याओं, जो मेरी ही बहने थीं , ने एकल स्वर में कहना प्रारंभ किया कि स्टोव देवता आओ स्टोव देवता आओ। मेरे आश्चर्य की सीमा न रही जब मैंने देखा कि एकदम से स्टोव की एक टांग ठक ठक करने लगी । चूँकि सभी लडकियाँ मेरी बहने थी और सभी सरल स्वभाव वालीं थी, इसलिए शक्-शुबह की कोई गुंजाइश नहीं थी। सभी दर्शकों में एक आनंद मिश्रित कौतुहल छाया हुआ था ।
दर्शकों मे से किसी ने कहा कि देवता आ गये हैं फिर उन्हीं से ही किसी एक ने स्टोव में आईं तथाकथित आत्मासे पूछा कि शर्बत में मीठा ठीक है । स्टोव से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । इस पर फिर किसी ने कहा शक्कर और चाहिये । स्टोर से ठक की एक आवाज़ आई । हम सब मंत्र मुग्ध होकर यह सब देख रहे थे । लोग अलग अलग प्रश्न पूछ रहे थे और स्टोव देवता ठक ठक कर उत्तर दे रहे थे । मुझे यह समझ में नहीं आया कि लोग अपने सवालों के सही उत्तर पा रहे हैं या नहीं । तबतक मेरी एक अन्य बहन जो वहाँ बैठी थी उन्होंने मुझसे जुड़ा एक प्रश्न स्टोव देवता के सामने पेश कर दिया । अब मेरे कान खड़े करने की बारी थी । मै बहुत ध्यान से स्टोव देवता का उत्तर सुन रहा था । उस समय स्टोव देवता का उत्तर मुझे हास्य -पद लगा। उस प्रश्न के उत्तर में स्टोव देवता ने 17 बार ठक किया था। मैंने उस समय उक्त महात्मा के संदेश पर संदेह व्यक्त किया । समय के साथ बात आई-गई हो गई । परन्तु वर्ष 1988-89 में जब मेरा बैंक की ओडिशा में स्थित एक शाखा से अंतरराज्यीय -स्थानांतरण लखनऊ के बैंक के कार्यालय में हुआ तब मुझे 1972-73 के स्टोव देवता के 17 बार के ठक ठक की याद आई और आश्चर्य हुआ । अब आप ही बताइए कि मुझे तृतीय विश्व के वजूद का विश्वास क्यो नही करना चाहिए ।
सन् 1972 -73 की बात है लखनऊ में जगह जगह लोग कहते फिरते थे कि प्रभात स्टोव में एक पहुंचे हुए महात्मा की आत्मा आती थी । इस बात का बहुत प्रचार था । जिज्ञासा वश अथवा कौतुहल वश जहाँ देखो लोग उन महात्मा की आत्मा का आह्वान उस स्टोव के माध्यम से करते थे, जिसकी प्रक्रिया बहुत सरल थी । प्रभात स्टोव, मिट्टी के तेल से जलने वाला, एक स्टोव था, जो प्राय: उस समय सभी घरों में उपलब्ध था । उक्त दिवंगत महात्मा की आत्मा को आह्वान करने की प्रक्रिया भी बहुत सरल थी । उस स्टोव की टंकी को बस खाली करके पूरे स्टोव को टंकी सहित बड़ी सफाई से धोकर उसकी टंकी में चीनी का शर्बत भर दिया जाता था और स्टोव महान आत्मा के आह्वान के लिए तैयार हो जाता था ।
पुराने जमाने के लोगों को याद होगा कि इस स्टोव में तीन टांगे हुआ करती थी । पम्प वाले इस स्टोव में महान आत्मा के आह्वान के समय पम्प का कोई मतलब नहीं होता था । बस एक स्वच्छ स्थान पर रख कर तीन कुंवारी कन्याओं को स्टोव के तीन पैरों के ऊपरी भाग में
अपनी तर्जनी रख कर स्टोव देवता के नाम से मशहूर उन महान आत्मा का आह्वान करना होता था । मेरे घर में एक शादी थी अत: मैं भी घर के रिश्तेदारों के समागम में वहाँ उपस्थित था । मेरे सामने उस महान आत्मा का आह्वान तीन कुआँरी कन्याओं के द्वारा किया गया । उन कन्याओं, जो मेरी ही बहने थीं , ने एकल स्वर में कहना प्रारंभ किया कि स्टोव देवता आओ स्टोव देवता आओ। मेरे आश्चर्य की सीमा न रही जब मैंने देखा कि एकदम से स्टोव की एक टांग ठक ठक करने लगी । चूँकि सभी लडकियाँ मेरी बहने थी और सभी सरल स्वभाव वालीं थी, इसलिए शक्-शुबह की कोई गुंजाइश नहीं थी। सभी दर्शकों में एक आनंद मिश्रित कौतुहल छाया हुआ था ।
दर्शकों मे से किसी ने कहा कि देवता आ गये हैं फिर उन्हीं से ही किसी एक ने स्टोव में आईं तथाकथित आत्मासे पूछा कि शर्बत में मीठा ठीक है । स्टोव से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । इस पर फिर किसी ने कहा शक्कर और चाहिये । स्टोर से ठक की एक आवाज़ आई । हम सब मंत्र मुग्ध होकर यह सब देख रहे थे । लोग अलग अलग प्रश्न पूछ रहे थे और स्टोव देवता ठक ठक कर उत्तर दे रहे थे । मुझे यह समझ में नहीं आया कि लोग अपने सवालों के सही उत्तर पा रहे हैं या नहीं । तबतक मेरी एक अन्य बहन जो वहाँ बैठी थी उन्होंने मुझसे जुड़ा एक प्रश्न स्टोव देवता के सामने पेश कर दिया । अब मेरे कान खड़े करने की बारी थी । मै बहुत ध्यान से स्टोव देवता का उत्तर सुन रहा था । उस समय स्टोव देवता का उत्तर मुझे हास्य -पद लगा। उस प्रश्न के उत्तर में स्टोव देवता ने 17 बार ठक किया था। मैंने उस समय उक्त महात्मा के संदेश पर संदेह व्यक्त किया । समय के साथ बात आई-गई हो गई । परन्तु वर्ष 1988-89 में जब मेरा बैंक की ओडिशा में स्थित एक शाखा से अंतरराज्यीय -स्थानांतरण लखनऊ के बैंक के कार्यालय में हुआ तब मुझे 1972-73 के स्टोव देवता के 17 बार के ठक ठक की याद आई और आश्चर्य हुआ । अब आप ही बताइए कि मुझे तृतीय विश्व के वजूद का विश्वास क्यो नही करना चाहिए ।
- शरद कुमार श्रीवास्तव
रविवार, 6 मई 2018
एक चैती गीत
टेसू के फूल खिले हैं रामा
बगियन में मा अमवा~~
खुशी के दिन अइ गे हो रामा
खलिहान मा अनजवा
सोना लदे बिरवन मा हो रामा
अंगना मा गोरियाँ
महकन लगे बिरुआ मा महुआ हो रामा
अनाज भरी बोरियाँ
नवमी का जनमिहैं महल मा हो रामा
कौसिलिया दसरथ के दुलरुआ
सब लोगवा लुटइहैं गहना असर्फी हो रामा
बधाई राजा के दुअरुआ
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