प्रेमपत्र
प्रेमपत्र लिख भेज रहा हूँ
प्रिये अगर स्वीकार हो
मेरे कहने की बात नहीं
तुमको भी गर प्यार हो
जल्दबाजी की बात नहीं
फूलों को रखो फुर्सत से
दिल गर बेकाबू भी हो तो
इकरार करो जी फुर्सत से
मत देखो तुम मेरी काया
न लट न बिखरे केशों को
मन मैंने सोने सा बनाया
न देखो मेरे आवेशों को
तुमको भी हो मुझको भी
तब तो फिर इनकार नहीं
मत कह देना मुझसे तुमतो
मुझ को तुमसे प्यार नहीं
शरद कुमार श्रीवास्तव