झटका भला
ठहरे पानी सा जीवन
ऊबने लगा है ये मन
कतार में खड़ा हुआ
हलाल होने के लिए
निरीह पशु के जैसा
व्यर्थ पुकार लगाता
नकेल 'समय' के पास
रेतना कब शुरू करेगा
कुछ पता नही चलेगा
सलीब पर पूछी जाती
अंतिम इच्छा कैदी की
यहाँ नहीं! न दया ही
धार दार छूरी आहिस्ता
आहिस्ता ही फिरती रहेगी
वक्त के साथ! झटका भला
ठहरे पानी सा जीवन
ऊबने लगा है ये मन
कतार में खड़ा हुआ
हलाल होने के लिए
निरीह पशु के जैसा
व्यर्थ पुकार लगाता
नकेल 'समय' के पास
रेतना कब शुरू करेगा
कुछ पता नही चलेगा
सलीब पर पूछी जाती
अंतिम इच्छा कैदी की
यहाँ नहीं! न दया ही
धार दार छूरी आहिस्ता
आहिस्ता ही फिरती रहेगी
वक्त के साथ! झटका भला
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें