कोशिशों बाद न बिसरी तमाम बातें
तुम्हारे इन्तजार में सूनी तमाम रातें
रातों ने बिछाई शतरंज की बिसातें
जीत लीं मुझसे वो नींद की सौगातें
छेड़ता हूँ तसव्वुर का तार जब शब
उनींदा ख्वाब के स्वर इठलाते हैं तब
स्याह सी बदनुमा लकीर खींच कर
दिल के गुलशन में खार बो जाते हैं
मुद्दतों बाद जब सोने की बारी आई है
सर्द पड़ी चादर मौसम की रुसवाई है
इल्तिजा तुमसे तन्हाइयों रुखसत न होना
तुमसे आबाद अब इस दिल का हर कोना
बड़ी तरतीब बड़ी शिद्दत से संजोया इसको
खुशनुमा यादों की माला मे पिरोया इसको
जिसे कहते हैं पैगाम तुझ तलक भेज पाता
झिलमिल सितारो मे पता गर चे मिल जाता
शरद कुमार श्रीवास्तव