रविवार, 29 मार्च 2020

महालय के सुर



आज फिर नया गीत गुनगुनाओ
नये सुरों के साथ परचम लहराओ
शाम से रागिनी गा रही है तराना
हो सके इधर जरा तुम आ जाना

हवाओं की खुशबू तुम्हारे लिये है
हमारी जुस्तजू बस तुम्हारे लिये है
अखियोंं का कजरा तुम्हारे लिये है
वस्त्र श्रृंगार सब ये तुम्हारे लिए है


तेरे  लिये  रची जा रही है कहानी
वयइति संधि की है सुन्दर जवानी
कलम की नोक बनी है सेन्दुरदानी
वरमाल संग आ महालय की रानी


शरद कुमार श्रीवास्तव





कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें