मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

यादों का सिलसिला

यादों के मेरे इस शहर मे एक घर सिर्फ तेरा ही है।
मेरी दास्ताने इश्क मे चर्चा भी सिर्फ तेरा ही है ।।
कोई आये या न आए इस वीरान पड़े गुलशन मे  
ठूठों मे भला कोई गुल क्या कभी परचम होगा ।।

बात यादों की नहीं है न उनकी बारात का जिक्र 
ख्याल खुद- ब खुद  सिलसिलेवार चले आते हैं।।
जैसे कल ही की बात हो या अभी बीते पल की
तसव्वुर फुसलाकर ले जाते हैं भूले सुहाने मंजर।।

ऐहसास पसरी हुई तन्हाई  का न होता मुझको
काली स्याह रातें ही जुल्फों मे भर लेती मुझको ।।
फिक्र  करना नहीं कभी न मेरा जिक्र ही करना
रेत के टीले कभी सब्ज बाग संजो पाये हैं भला।।

शरद कुमार श्रीवास्तव