हे मित्र 2018
विदाई तुम्हारी हो रही है
सारा विश्व भूला तुरंत
आगत के स्वागत में जुटा है
देखता हूँ पलटकर तू
विगत के प्रकोष्ठ पर सटा है
बहुत कुछ गोचर है लेकिन
कुछ गुमनामी मे बटा है
कैसे भूल जाऊं तुमको
दिये कितने लम्हे प्यारे
दिया मुझको बहुत कुछ
खुशियों के प्रसून सारे
मृत्यु के सानिध्य से मुझको निकाला
साढ़ेसाती के प्रकोप का मै था निवाला
ज्येष्ठा पुत्री के आंचल मे प्यारी नातिन को डाला
न भूलेंगे कभी हे 2018 तुमको कभी भी
उपकार तुम्हारे बहुत , ऋणी है हम चिर तुम्हारे
शरद कुमार श्रीवास्तव
विदाई तुम्हारी हो रही है
सारा विश्व भूला तुरंत
आगत के स्वागत में जुटा है
देखता हूँ पलटकर तू
विगत के प्रकोष्ठ पर सटा है
बहुत कुछ गोचर है लेकिन
कुछ गुमनामी मे बटा है
कैसे भूल जाऊं तुमको
दिये कितने लम्हे प्यारे
दिया मुझको बहुत कुछ
खुशियों के प्रसून सारे
मृत्यु के सानिध्य से मुझको निकाला
साढ़ेसाती के प्रकोप का मै था निवाला
ज्येष्ठा पुत्री के आंचल मे प्यारी नातिन को डाला
न भूलेंगे कभी हे 2018 तुमको कभी भी
उपकार तुम्हारे बहुत , ऋणी है हम चिर तुम्हारे
शरद कुमार श्रीवास्तव
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