शनिवार, 1 जून 2024

बिसरती यादें

 सुहाना सा सफर है और यादें

बहारों का असर है और यादें

इधर आच्छादित टिकोमा चम्पा

उधर रातरानी सुगंध समेटे यादें।।


प्यारे नगमे समेटे दिलचस्प यादें

अनुपम अनुराग बटोरे मधुर यादें

शिशुओं संग आल्हादित सफर ये

बिखरती सिमटती दूर जाती यादें


भला क्यों समेटें धुंधली सी बाहे

नवोदय पर गुम हो जायेंगी राहे

बचा है सफर जो करना है सुहाना

यादों बस तुम मेरी यादों मे न आना


शरद कुमार श्रीवास्तव 

  

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