बुधवार, 18 जनवरी 2017

आज की  गजल 
गजल के लिये  इक हंसीं तस्वीर होना चाहिए  
तासीर भी अच्छी गजल की यह जरूरी  नहीं 
गजल मामूल भी हो तो  चल जाएगी  जरूर 
 बशर्ते तस्वीर में हसीना शोख होना  चाहिये 

ये जमाना और है, फेसबुक वाट्सअप का दौर है
चल नहीं सकती कोई इबारत गौर होना चाहिये 
लिख सकते तो लिखो किताबों मे बेशक लिखो 
पढ़ने के लिये फरिश्ते भी तो और होना चाहिये 

शरद कुमार  श्रीवास्तव 

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