आज की गजल
गजल के लिये इक हंसीं तस्वीर होना चाहिए
तासीर भी अच्छी गजल की यह जरूरी नहीं
गजल मामूल भी हो तो चल जाएगी जरूर
बशर्ते तस्वीर में हसीना शोख होना चाहिये
ये जमाना और है, फेसबुक वाट्सअप का दौर है
चल नहीं सकती कोई इबारत गौर होना चाहिये
लिख सकते तो लिखो किताबों मे बेशक लिखो
पढ़ने के लिये फरिश्ते भी तो और होना चाहिये
शरद कुमार श्रीवास्तव
गजल के लिये इक हंसीं तस्वीर होना चाहिए
तासीर भी अच्छी गजल की यह जरूरी नहीं
गजल मामूल भी हो तो चल जाएगी जरूर
बशर्ते तस्वीर में हसीना शोख होना चाहिये
ये जमाना और है, फेसबुक वाट्सअप का दौर है
चल नहीं सकती कोई इबारत गौर होना चाहिये
लिख सकते तो लिखो किताबों मे बेशक लिखो
पढ़ने के लिये फरिश्ते भी तो और होना चाहिये
शरद कुमार श्रीवास्तव
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