बुधवार, 13 सितंबर 2017

समय







वक्त से गिला
क्या करें कोई अब-
बदली हवा

दिखा रही हैं
अपनी  ये अदाएं -
शोख हवाएं 

कभी धीरे से
फुसफुसा जारही-
कर्ण प्रिय सा

मधुर धुन
से मिश्रित  संगीत-
मधु यामिनी

सब्र का पाठ
या तपती धूप में
लेकर छाता

प्यार का फाहा
समय ही लगाता
ज़ख्मी दिल पे

समझौता क्यों
न करो समय से
वह मर्मग्य

यह वक्त  ही
जाने दर्द तुम्हारा
हमेशा से ही

शरद कुमार  श्रीवास्तव 

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