वक्त से गिला
क्या करें कोई अब-
बदली हवा
दिखा रही हैं
अपनी ये अदाएं -
शोख हवाएं
कभी धीरे से
फुसफुसा जारही-
कर्ण प्रिय सा
मधुर धुन
से मिश्रित संगीत-
मधु यामिनी
सब्र का पाठ
या तपती धूप में
लेकर छाता
प्यार का फाहा
समय ही लगाता
ज़ख्मी दिल पे
समझौता क्यों
न करो समय से
वह मर्मग्य
यह वक्त ही
जाने दर्द तुम्हारा
हमेशा से ही
शरद कुमार श्रीवास्तव

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