रविवार, 1 अक्टूबर 2023

रजत मुकुट

 ऐसा नहीं है कि मै सब भूल गया हूँ ।  लवलेन तब भी थी। तुम्हारे हमारे मिलने के शुरुआती दिनो मे भी थी ।   मै तुम्हे इम्प्रेस  करने के लिये, वहाँ से एक परफ्यूम तथा रुमाल का एक पैकेट , तुम्हारे जन्मदिन  पर तुम्हे उपहार देने  के लिये  लाया था।  हमारे संबंधों पर हमारे विवाह  की अधिकारिक  मोहर लग चुकी थी फिर भी मन मे बेकरारी थी तुम्हारे बर्थडे मनाने की ।   शाम  को जब तुम राजा स्वीटहाउस मे अपनी एक सहेली के साथ  आईं थी और चाट तथा कुल्फी के साथ तब पेस्ट्री काट कर तुम्हारा जन्मदिन  मनाया गया था।


 अब हमारे साथ हमारी लाडली भी  है और हमारी ऑफिस  की व्यस्तताएं हैं ।  आज तुम प्रात: मुझे शिकायत भरी नज़रों से देख रही थीं जैसे मेरी व्यस्त  जीवन  मे किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं करना चाह रहीं थी फिर भी शिकवा भरी नजर सब कह दे रहीं थी कि  मै कैसे विवाह  की  वर्षगांठ  भूलगया और वह भी पच्चीसवीं  । जीवन की व्यस्ततम पल मे तुमको मै कैसे अपनी कैफ़ियत दूँ ?  मैने अपने ऑफिस  का बैग उठाया ,  तुम्हे हमारी रजत जयंती की बधाई  दी और  बाहर  इंतजार  करती गाड़ी पर बैठ गया । अब भी एक  प्रश्नचिन्ह तुम्हारे चेहरे से झलक रहा था कि अब हमारा वह प्यार, हमारे जीवन की वह स्निग्धता,  हमारा वह दीवानापन आदि कहाँ चले गए ?   शायद  तुम सोचती हो कि तुम भी  एक मशीन  के पुर्जे सी बनकर रह गई  हो ।   मशीन  को भी तेलपानी की जरूरत  होती है । अवकाश  की आवश्यकता होती है पर हमारी  यह जिन्दगी  तो एक पड़ाव रहित निरंतर दौड़ दौड़ने वाले सूर्यदेव के रथ मे जुते अश्वों के समान हो गई है जो रुकना ही नही जानते है।   अविरल बस  दौड़ते  चले जाते हैं और  वे इतना भी नहीं देखते कि पीछे भी कोई है।

तुम्हारा सोचना शायद सही ही है ।  जीवन विभिन्न  आवश्यकताओं का एक समूह मात्र बन गया है।  घर  की आवश्यकताओं की आपूर्ति, बच्चों की बेहतर  शिक्षा, बेहतर आवास ,बेहतर  इलाज  ****** आदि आदि अनन्त इच्छाएं, और फिर अनन्त आवश्यकताएं !

आज भी कुछ  ऐसा ही है ।   शिखर पर खड़ी हैं आज घर की आवश्यकताओं को समेटी हुई  ऑफिशियल  प्राथमिकताएँ ।   ऑफिस मे पहचान से ही तो सारी पहचान  जुड़ी हैं।  क्षेत्र  मे संगठन  के अध्यक्ष  का औचक दौरा और समस्त  विभागो की रिपोर्ट्स  का मेरे द्वारा अध्यक्ष  महोदय  को प्रस्तुतिकरण !  क्या अब भी कोई स्पष्टीकरण  चाहिए?  

अभी कल तुम  कह रही थी  माॅल चलना है ।  मै जानता हूँ मेरे लिए एक अच्छी सी घड़ी खरीदना चाहती हो।  फिर तुम  यह भी कहती हो कि पुरानी घड़ी भी तो ₹10000 /- की है फिर  सही से चल भी रही है फिर  यह फिजूल खर्ची क्यों?  तुम  भी तो स्पष्ट  नहीं हो कि क्या खरीदना है। 

हाँ कामो की व्यस्तता के अलावा एक और  वजह  है ।  सुरुचि भी तो अगले हफ़्ते आने वाली है।  उस के बगैर सिल्वर  जुबली सेलीब्रेट करना सही रहेगा क्या ?  गाड़ी मे इसी तरह  अपने आप  को कैफ़ियत  देता रहा और  फिर ऑफिस  के कामो मे व्यस्त  हो गया।  

ऑफिस मे लंच के बाद  पता चला कि पहले से निर्धारित  कार्यक्रम मे बदलाव  आ गया है और  आज  का कार्यक्रम कुछ दिनो के लिये टल गया है।  ऑफिस  के आवश्यक  काम निपटा कर मैने तुमको   तैयार  रहने के लिए फोन किया और  जल्दी से पहुँच  गया ।  आज का दिन  सिर्फ  तुम्हारा है ।  पूरी तरह से तुम्हारा है ।   सिल्वर जुबली तुम्हारी है, सेलिब्रेशन  अगले सप्ताह बिटिया सुरुचि, परिजनो तथा मित्रों के लिए  है और  हमारे लिये तो सिर पर पहले से ही है जिम्मेदारियों का रजत मुकुट ।





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