चलो तरन्नुम मे नया गीत गायें
हौसले भरे कहकहे हम लगाएं
इन्द्रधनुषी हों मधुर सपने हमारे
जहाँ निहारे हों सितारे ही सितारे
धुनों का बुन सुन्दर सा वो तराना
जुनून-ए-परिस्तिश का अफसाना
जोश भर पत्थर हवा मे तो उछाले
अलक से फलक एक कर डाले
शरारे इश्क छेड़ रगों मे ले सरगम
मुशाहरा मे गुम दिल की धड़कन
जुस्तजू दिल से हो, बन्दिश न भरम
जिद्दोजहद हो पूरी बाकी उसका करम
शरद कुमार श्रीवास्तव
परिस्तिश =पूजा, आराधना,
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