बुधवार, 15 जनवरी 2025

अपना ये रंजोगम सारी परेशानी मुझे देदो

ना आँखें नम करना, ना रोना बिलखना

बड़े सब्र से तब तुम मुझे याद  रखना

शबे- फुरकत तक जब नहीं हो सकता मिलना

इन आंसुओ को अब न जरा खर्च करना


मयस्सर  ही होना है हमारा बस मिलना

बड़े सब्र से अब तुम जरा धैर्य  रखना

फलक तलक रोकेगीं क्या जुल्मी हवाएं

बहुत जुल्म  ढाएंगी जो बेवफा फिजाएं


फुरसत से फिर अपनी मुलाकात होगी

रंजोगम पर फिर फुरसत से बात होगी

चाँद तारों की महफिल सजे तेरी खातिर

कयामत मे, ऐसी हमारी तैयारी रहेगी।। 


शरद कुमार  श्रीवास्तव 

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