शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

बसन्त के स्वागत मे

 


अलि तुम आली से कहना अब बसन्त आने को है

चहकने लगी हैं कलियाँ  भ्रमर दल लहराने को है

हवा मे अब गुलाबी ठंड , फिजा भी मस्त  मस्त है।

पीली सरसों की खुश्बुओं से मौसम लब्ध लस्त है ।।


तरु पर नूतन किसलय नई कोपलें फूटने को हैं

शिशिर के अति आतंक से जगत अब छूटने को है

पर्वत  पिघलने लगे शिखर नदियों का कलकल मनोहर है

धरती भर मे गूंजता आसन्न चैती का सुन्दर  सोहर है ।।



ऋतुराज आने के आगाज से, जामुन आम बौराया

तितलियों मवरों के दलों ने आगमन का प्रीतराग गाया

इधर हाला उधर टेसू पलाश  होली का  रंग मदमाता

लगा अब कोयल पिक पक्षीजन स्वागत  गीत  स्वर मे गाता ।।

शरद कुमार श्रीवास्तव 

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