शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

जिन्दगी


मेरी  जिन्दगी मुझसे यूं दामन न छुड़ा
पहलू मे मेरे बैठ जरा मेरे पास तो आ
तू हसीं है जवां दिलो की  चाहत है
पर तुझसे मेरे दिल को भी राहत है

जिन्दगी जीने की  तमन्ना  कम न होगी
मौत की चौखट पे भी यह कम न होगी
कभी कम कभी एकदम गायब होती ये
फिर यकायक रूबरू हो जाती जिन्दगी

जिन्दगी  पाने की इच्छा जगी फिर दिल मे
 फिर और  जीने  की चाहत  जगी दिल मे
आरजू  है जिन्दगी  से यूं  दामन  न छुड़ा
पहलू मे मेरे  बैठ जरा मेरे  पास तो आ

शरद कुमार  श्रीवास्तव 

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