सोमवार, 1 जनवरी 2018

आप आये बहार आयी




महफिल में आप आये  बहुत  अच्छा
बहारों से नगमा लाये  बहुत  अच्छा
गुनगुनाने की आदत नहीं  थी मुझमे
मेरे तराने सुरताल पाये बहुत अच्छा

आसमा में  टंके थे चान्द सितारे तब भी
अब हमको भी नजर आए बहुत अच्छा
वक्त के  साथ  हालात भी बदल जाते  हैं
ये घड़ी कुछ और थम जाये बहुत अच्छा

मुरझाए फूल खिल गए ओस की बूँदों से
लौट आयी खिजां में बहार बहुत अच्छा
रश्क मैं तुम पे करूं या करूं किस्मत पे
चलो तुम जरा  मुस्कराये  बहुत अच्छा

शरद कुमार  श्रीवास्तव




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