महफिल में आप आये बहुत अच्छा
बहारों से नगमा लाये बहुत अच्छा
गुनगुनाने की आदत नहीं थी मुझमे
मेरे तराने सुरताल पाये बहुत अच्छा
आसमा में टंके थे चान्द सितारे तब भी
अब हमको भी नजर आए बहुत अच्छा
वक्त के साथ हालात भी बदल जाते हैं
ये घड़ी कुछ और थम जाये बहुत अच्छा
मुरझाए फूल खिल गए ओस की बूँदों से
लौट आयी खिजां में बहार बहुत अच्छा
रश्क मैं तुम पे करूं या करूं किस्मत पे
चलो तुम जरा मुस्कराये बहुत अच्छा
शरद कुमार श्रीवास्तव
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