रविवार, 18 फ़रवरी 2018

बसंती गीत




भ्रमर तुम गीत गाते प्रणय का राग सुनाते हो
मधुर गीतों को भर  मदिर  झंकार सुनाते हो
भरे रंग हर मौसम में ये उनकी ही  कहानी है
बसंत जब रंग लाता तुम उसमे  डूब जाते हो
बसंत में अनंग  संगसंग  तुम भी आये हो
फ़िज़ा मे  है मस्ती  जवानी खेतों में है छाई
नादान कलियाँ भी मदिर गीतों से हैं बौराई
छुपाते हो क्यों  सनम से मिल केआये  हो
उन्होंने तुमको भेजा  है वे खुद नहीं  आये
आना मुश्किल था  भेजा मदन  को  क्यों
सारे तीर तरकश के हमपर  छोड़ता रहता
नशा उससे सदा जेहन पर छाया सा रहता
सन्देशा ही  सहारा है जिसे छुपाये जाते हो `
महा ज्ञानं से भरपूर  संदेशा ले के आते हो
तेरा सनम सगुण है निर्गुण भी वही ही है
भला वो तुझसे दूर या तुझसे जुदा भी है
भ्रमर काले तुम तुम्हारा दिल भी है काला
प्रेम को समझेगा जो हो  प्रेम में मतवाला
समेटो ज्ञान की पोथी हमें बस सनम लादो
वो मोहन अपना कृष्ण बंसी बज्जैया लादो
उसको बतलादो  ये बस बिनती हमारी है
हमें न चैन मिलता है प्रीत की  बीमारी है
भ्रमर जो रूप उद्धव का सखा महाज्ञानी हैं
उन्होंने भी ज्ञान पर जीत प्रेम की मानी है
शरद कुमार श्रीवास्तव

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