रविवार, 18 फ़रवरी 2018

आदमी की परिभाषा




तस्वीर में दुश्वारियां हैं तू ना जाने कौन है
पुमंग  का रूप धारे  खड़ा क्यों मौन है
दर्प है या पीड़ा कुछ भी समझ आता नहीं
वृक्ष सा तन कर खड़ा प्रश्न बन भाता नहीं

स्पर्श में कोमल मनोहर जरा एहसास हो
दर्द कोसों दूर भागे फिर सुगंधित वास हो
लहलहाती सी हवा छूू कर जाती है तुझे
तस्वीर में खूबसूरत सी महक आती मुझे

दर्द सारे है समेटे उफ नहीं करता मगर
लोगों को तस्वीर में दर्प आता है नजर
तन कर रहना प्रकृति  पर, अकड़  नहीं
आदमी है आदमी में ये मुझे आता नजर

शरद कुमार श्रीवास्तव

पुमंग=Androecium

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