रविवार, 21 अप्रैल 2024

युग प्रणेता

 युग प्रणेता


चले अकेले

एक प्रण लेकर 

कथा रचने


गढ़ने नये

इतिहास  का पृष्ठ 

स्वर्णिम युग 


लोहे की छेनी

हथौड़ा साधारण 

जन मानस


विचार उगे

अद्भुत  अनुपम

सोने का मृग


ये मारीचिका

करती दिग भ्रान्त 

भटका लक्ष्य


संभलकर 

कोद॔ड उठाकर 

आखेट कर


लिखो कहानी

जन मानस पर

फिर उठके


सीता हरण

नही हो फिर कभी

आजानबाहु



शरद कुमार श्रीवास्तव 




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