कुछ गरम गरम कुछ शीत शीत
थोड़ा गुस्सा फिर भी प्रीत प्रीत
ऐसा कुछ मिज़ाज मौसम का भी
एयर कंडीशनर मे लगे शीत शीत
कोपल पेड़ों मे फूटे कुदरत की रीत
नूतन किसलय, श्यामा के नये गीत
जामुन आम फूल फल नित नवीत
अमलतास से पुष्प बर्षा पीत पीत
कुछ अन्न अभी खेतों खलियानो मे
कुछ पड़े हुए अभी भी मैदानो ही मे
हिम पिघल रही है हिम फिसल रही
लू बयार तो बेमौसम वर्षा बिफर रही
निर्झर पर्वत , पंछी मस्त बागवानों मे
गर्मी का प्रतिदिन प्रकोप मैदानों मे
श्रम उद्यम के माथे पे बहती जलधारा
तपती घूप मे बटोही चले रुके थमथम
इस मौसम की कथा ही निराली है
उपलों मे हिमवर्षा पृथ्वी पर बवाली है
जेष्ठ माह की अभी शुरुआत हुई है
गर्मी का प्रकोप न रुकता एक क्षण
शरद कुमार श्रीवास्तव


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