गुरुवार, 7 मई 2026

पतझड़ काल

जीवन मे शुष्क हवाएं लिए मौसम 

मुस्कान संजोए चेहरे कहीं दर्द  है

छुपाते हो क्या सब की है कहानी

कभी दुख तो फिर  सुख भी आनी



रात अंधेरी  या चंदेरी रोशनी रही फूट

बाँह हो साथी की अतिशय सुख  लूट 

पत्ते पेड़ों से झड़ रहे खड़- खड़ अनन्त 

गर जीवन का सत्य है तो आने को बसंत 


जामुन महुआ टेसू फूलेंगे और रसाल

कोयल पिक फिर कूकेंगे नाचेगे मराल 

शुष्क  हवाएं हैं अभी जीवन  का सत्य

गुजरेगा यह पल भी अब आएगा बसंत। ।


शरद कुमार श्रीवास्तव 

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