जीवन मे शुष्क हवाएं लिए मौसम
मुस्कान संजोए चेहरे कहीं दर्द है
छुपाते हो क्या सब की है कहानी
कभी दुख तो फिर सुख भी आनी
रात अंधेरी या चंदेरी रोशनी रही फूट
बाँह हो साथी की अतिशय सुख लूट
पत्ते पेड़ों से झड़ रहे खड़- खड़ अनन्त
गर जीवन का सत्य है तो आने को बसंत
जामुन महुआ टेसू फूलेंगे और रसाल
कोयल पिक फिर कूकेंगे नाचेगे मराल
शुष्क हवाएं हैं अभी जीवन का सत्य
गुजरेगा यह पल भी अब आएगा बसंत। ।
शरद कुमार श्रीवास्तव
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