गुरुवार, 7 मई 2026

अनसुनी और कान की मशीन

 तूने कुछ कहा, क्या  कहा ,जो रहा अनसुना

मैने नहीं सुना, जो भी सुना, वो रहा अनसुना

तूने तो कहा फुसफुसा के कहा रहा अनसुना 

कुछ मुस्कराके, सिर हिलाके, सुना  झुनझुना।।


कुछ  नया हो सुनू अपने कान की रुई हटा के

सुनू मैं गर जरूरी,  कान की मशीन  लगा के

फ्रेश  सेल्स भी  कान की मशीन मे डलवा के

अता-पता  या सिला हो, तो जहमत उठाके ।।


बातें तो रही पुरानी, हो रही, आगे भी आनी।

नानी की कहानी, मम्मी की जुबानी सुनी सी

अब क्या सुनू सिर को खपा के ध्यान लगाके

अता पता कोई सिला हो तो बाकी सब बेकार 


नहीं सुनना मेरे यार कान की मशीन लगाकर 



शरद कुमार  श्रीवास्तव 

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