आनंद के पल
उडने को है तैयार परिन्दे
कुछ हँस ले कुछ गा ले
चार पल आनन्द मना ले
सुर सजा और गीत गा ले
माना हम अब है शाम ढली
राह कठिन अंधियारी गली
क्यों चिन्ता करता है परिन्दे
क्यों निराशा तेरे मन में पली
डाल पे बैठकर सुर मिलाले
कुछ हँस कर कुछ गा ले
हर पल बस आनंद मना ले
जीवन का हर आनंद उठा ले
पहले थे दिन रात मनोहर
खट्टे मीठे रसदार मनोहर
उन्हें याद करके तू पंछी
निज चैन, मत- हर मत- हर
आयगी अब रात मनोहर
शीतल चांद यामिनी सुन्दर
मृदु राग घोलती अंबर पर
आ जा सुर मे सुर मिलाले
समय की लडी के मोती
चुन नव स्वप्न सजा ले
चिंताओं से बाहर होकर
जीवन का आनंद मना ले
शरद कुमार श्रीवास्तव
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