बुधवार, 11 अक्टूबर 2017

आनंद के पल



आनंद  के पल

उडने को है तैयार  परिन्दे

कुछ हँस  ले  कुछ  गा ले

चार पल  आनन्द मना ले

सुर सजा और गीत गा ले

माना हम अब है शाम ढली

राह कठिन अंधियारी गली

क्यों चिन्ता करता है परिन्दे

क्यों निराशा तेरे मन में पली


डाल पे  बैठकर सुर मिलाले

कुछ  हँस  कर  कुछ  गा ले

हर पल बस आनंद  मना ले

जीवन  का हर आनंद उठा ले

पहले थे दिन रात मनोहर

खट्टे मीठे रसदार मनोहर

उन्हें  याद करके  तू पंछी

निज चैन, मत- हर मत- हर

आयगी अब रात मनोहर

शीतल चांद यामिनी सुन्दर

मृदु राग घोलती अंबर पर

आ जा सुर मे सुर मिलाले

समय की लडी के  मोती

चुन नव स्वप्न  सजा  ले

चिंताओं  से बाहर  होकर

जीवन का  आनंद  मना ले

शरद  कुमार  श्रीवास्तव








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