मेरी एक अवधी रचना
निर्गुन
संझा के बादे अंधेरिया, अब का करिबे बाबू
खाली है हमरी ढिबरिया हम का करिबे बाबू
समय काल रहत, सब सुध बुध हम गंवायेन
बंद भई सारी बजरिया , अब का करिबे बाबू
संझा के बादे अंधेरिया, हम का करिबे बाबू
तार तार हमरी चुनरिया, हम का ओढबै बाबू
बिन ओढे चुनरिया सब किरुआ हमका कटिहैं
ओढके राम-नामी चदरिया, हम सो जइबे बाबू
शरद कुमार श्रीवास्तव
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