तुम ही मेरी शायरी तुम ही गीत गजल हो
तुम ही मेरी मीत भी तुम ही प्यार अचल हो
तुम ही मेरे सुरों मे सजीं मेरी रागनी सरल हो
दिल पे तेरा राज है जादूगरनी रूप विमल हो
मेरी अराधना तुम्ही से है पूजा अविरल हो
तेरी रंजिश मुझे सहन नहीं जैसे तेज गरल हो
तुम ही मेरी शायरी तुम ही गीत गजल हो
तुम ही मेरी मीत भी तुम ही प्यार अचल हो
शरद कुमार श्रीवास्तव
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