बुधवार, 18 अक्टूबर 2017

एक प्रेम गीत




तुम  ही  मेरी शायरी तुम  ही गीत  गजल  हो
तुम  ही मेरी मीत भी तुम  ही प्यार  अचल हो
तुम ही मेरे सुरों  मे सजीं मेरी  रागनी सरल हो
दिल पे  तेरा  राज है जादूगरनी रूप विमल हो

मेरी अराधना  तुम्ही से है  पूजा अविरल हो
तेरी रंजिश मुझे सहन नहीं जैसे तेज गरल हो
तुम  ही  मेरी शायरी तुम  ही गीत  गजल  हो
तुम  ही मेरी मीत भी तुम  ही प्यार  अचल हो

शरद कुमार  श्रीवास्तव




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