गुरुवार, 2 नवंबर 2017

कठपुतली

सूर्य के  रथ के  घोड़े
अंबराम्भ के इस पार
से अंबरांत तक जाते
पूरा दिन बीत  जाता

आसमान के उसपार
के देवता  को आराम
नहीं,  बड़ी परिधि का
नियंत्रक है। इस लिये

मात्र घर के भीतर हाँफ
जाते  हम । इधर उधर
उठा  पटक दौड़ धूप के
बूता नहीं रहता बिल्कुल

पर बड़ी परिधि वाला वो
संचालित करता है एकाकी
सूरज के सातों घोड़ों को
हमको आपको दुनिया को

लेखक निर्देशक सूत्रधार वो
यहाँ तक अकेला दर्शक भी
हम तो बस उसके हाथों में
खेलती हुई मात्र कठपुतली

शरद कुमार  श्रीवास्तव


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