सूर्य के रथ के घोड़े
अंबराम्भ के इस पार
से अंबरांत तक जाते
पूरा दिन बीत जाता
आसमान के उसपार
के देवता को आराम
नहीं, बड़ी परिधि का
नियंत्रक है। इस लिये
मात्र घर के भीतर हाँफ
जाते हम । इधर उधर
उठा पटक दौड़ धूप के
बूता नहीं रहता बिल्कुल
पर बड़ी परिधि वाला वो
संचालित करता है एकाकी
सूरज के सातों घोड़ों को
हमको आपको दुनिया को
लेखक निर्देशक सूत्रधार वो
यहाँ तक अकेला दर्शक भी
हम तो बस उसके हाथों में
खेलती हुई मात्र कठपुतली
शरद कुमार श्रीवास्तव
अंबराम्भ के इस पार
से अंबरांत तक जाते
पूरा दिन बीत जाता
आसमान के उसपार
के देवता को आराम
नहीं, बड़ी परिधि का
नियंत्रक है। इस लिये
मात्र घर के भीतर हाँफ
जाते हम । इधर उधर
उठा पटक दौड़ धूप के
बूता नहीं रहता बिल्कुल
पर बड़ी परिधि वाला वो
संचालित करता है एकाकी
सूरज के सातों घोड़ों को
हमको आपको दुनिया को
लेखक निर्देशक सूत्रधार वो
यहाँ तक अकेला दर्शक भी
हम तो बस उसके हाथों में
खेलती हुई मात्र कठपुतली
शरद कुमार श्रीवास्तव
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