रविवार, 12 नवंबर 2017

रश्के आरजू




तेरे  इश्क  के जुनून में  रश्क किये  रहा हूँ  मै
तेरी बेरुखी में  गमे अश्क  पिये जा रहा हूँ  मै
जिन्दगी  के खुशनुमा बोसों ने तर कर दिया मुझे
सबों के होते हुए तन्हाइयाँ पिये जा रहा हूँ  मै

मै जानता हूँ तू मिलेगा, मेरी  जुस्तजू  कम नहीं
ऐसा  नहीं  है  कि मेरे हाल की  तुझे खबर नहीं
औरों की  इबादत क्या मुझसे तौल मे बढ़ के है
लगता है कि  मेरे इश्के जुनून पर तेरी नजर नही

आऊंगा तेरे दर पे समेट के जिन्दगी  की  नेमतें
ये न कहना तेरे असबाब  की  खबर न थी  मुझे
रश्क करता हूँ अपने जनून पर हर वक्त  मै मगर
चाहत भरे दिल में मेरे तू जरा सा गुरूर भी न दे

शरद कुमार  श्रीवास्तव

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