बुधवार, 8 नवंबर 2017

मजबूरी



है प्यार भी खफा खफा
इकरार भी हुआ  दफा
वक्त के सारे अफसाने है
हम अब भी तेरे दीवाने है

अर्सा हुआ तुमको मनाते
आखिर कोई बात बताते
खफा होने के कोई माने हैं
हम अब भी  तेरी दीवाने हैं

कई बार तुम्हें बताया  था
लाख मजबूरी बताया था
फिर आप क्यों  रूठ गये
लो गये गये हम गये गये

अभी थोड़ा सा  झमेला है
काम  का ही  रेलम पेला है
आडिट भी अब आया है
सिर भी  मेरा चकराया है

 तुम मुझको तो माफ करो
अपने मन को  साफ करो
समय के ये  बस तराने हैं
हम अब भी तेरे दीवाने हैं

शरद  कुमार  श्रीवास्तव








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