रविवार, 5 जून 2022

एक वृक्ष बस

 जेठ की दुपहरी मे

ठांव दे रहा बटवृक्ष

दिन मे शीतल छांव

और सांसो को सांस


शाखाओ को बिखेरे

स्वागत  करता हर पल 

बटोही तनिक  ठहर तू

विश्राम  कर फिर जाना


मै बादलो को रोक रहा 

खड़ा अकेला एकाकी

मानव की पिपाषा मे

कट रहे वृक्ष पर वृक्ष 


तुम एक  वृक्ष लगाओगे

धरा की प्यास  बुझाओगे

प्रश्न है पर जटिल  नहीं

एक संकल्प  करो बस


शरद कुमार श्रीवास्तव 




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