ब्लॉगर्स नेटवर्क पर हिन्दी साहित्य के लिए ब्लाग
कुछ हाइकु
कड़ी धूप मे
ठंडा कूल आभास-
धूप का चश्मा
हमसफर
छायादार वृक्ष हैं
श्वेत गगन
झरोखे मे बैठ
निहारती सुन्दरी
अमलतास
लाठी पकड़े
निस्तेज वृद्ध तन
लम्बी छलांग
शरद कुमार श्रीवास्तव
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें