बुधवार, 14 दिसंबर 2016

मेरी प्रेयसी मेरी कविता

पाने को सब
करता है मन
लेकिन  पाकर
रखूँगा  कहाँ ?
हर जगह तो
तू ही  है समाई
दिल दिमाग सपने
सभी जगह तो है
तुम्हारा  सशक्त  वजूद
मेरे  सुख मे तू
दुख का  कारण  भी तू
अब न गढूँगा कोई  कहानी
बस तुझी मे समाएगा मेरा वजूद
बस तू ही तू है  मेरी प्रेयसी मेरी कविता 

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