पाने को सब
करता है मन
लेकिन पाकर
रखूँगा कहाँ ?
हर जगह तो
तू ही है समाई
दिल दिमाग सपने
सभी जगह तो है
तुम्हारा सशक्त वजूद
मेरे सुख मे तू
दुख का कारण भी तू
अब न गढूँगा कोई कहानी
बस तुझी मे समाएगा मेरा वजूद
बस तू ही तू है मेरी प्रेयसी मेरी कविता
करता है मन
लेकिन पाकर
रखूँगा कहाँ ?
हर जगह तो
तू ही है समाई
दिल दिमाग सपने
सभी जगह तो है
तुम्हारा सशक्त वजूद
मेरे सुख मे तू
दुख का कारण भी तू
अब न गढूँगा कोई कहानी
बस तुझी मे समाएगा मेरा वजूद
बस तू ही तू है मेरी प्रेयसी मेरी कविता
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